कर्म अच्छे पर अंजाम बुरा--क्यों?

पिछली पोस्ट पर हमने कर्म और क्रिया पर संक्षेप में बात की थी- क्योकि यह समझना हमारे लिए बहुत जरुरी है कि कर्म घटित कब हो जाता है? अक्सर हमारी सोच यही रहती है कि बुरा करने से पाप की जोड़ बढ़ती है अर्थात किसी को जान से मार देने के बाद ही खून या कत्ल के पाप हमारे कर्म की जोड़ में बढ़ते है पर शास्त्र कहते है कि किसी को मारने का विचार  मात्र आ जाने से आप उस पाप के भागी हो जाते है इसलिए भावनाओ पर नियंत्रण सबसे अधिक जरुरी है अन्यथा बिना कुछ गलत किये भी पाप के भागीदार सिर्फ सोच से ही बन जाते है।
अक्सर एक सवाल सामने आता है कि कोई व्यक्ति बहुत सात्विक,परोपकारी जीवन जीता हुआ भी जीवन में संघर्ष,दुःख के तुफानो से जूझ रहा  दिखता है पर दूसरी तरफ हिंसक, लंपट प्रकृति वाला व्यक्ति समृद्धि वैभवशाली जीवन जीता हुआ दिखता है--- क्यों?
नैतिक व्यक्ति दुखी और अनैतिक सुखी---कर्मफल का पूरा सिद्धान्त  विपरीत कैसे?
सवाल जायज है क्योंकि अक्सर ऐसे उदाहरण सामने दिखते है तब सात्विक राह के दुखी पथिकों के मन में व्यथा का यह सवाल तो आ ही सकता है---पर कर्मफल का सिद्धान्त भी अपनी जगह सही है क्योंकि यहाँ पर न तो किसी की सिफारिश चलती है और न ही किसी की रिश्वत--अर्थात सब कुछ फिक्स मापदंडों के आधार पर रिपोर्ट बनती है और उसके आधार पर तकदीर चलती है।
तब सात्विक दुखी और लंपट सुखी क्यों?
जरा सोचिए अपने मन में--क्योकि विधाता के कंप्यूटर को न तो कोई हेक कर सकता है और न ही कोई सॉफ्टवेर या हार्डवेयर में रद्दोबदल कर सकता है या न ही कोई अपनी प्रोगरामिंग फीड कर सकता है इसलिए उत्तर साफ है कि जब तक किसी सात्विक के पुराने पाप कर्मों की फाइल चल रही है तब तक उसको उसके अपने पुराने पापों का दण्ड तो भुगतना ही पड़ेगा भले ही वो आज कितना भी सात्विक जीवन क्यों न जी रहा हो--ये आज के उसके पुण्य कर्म आगे के जीवन में अपना लाभ जरूर देंगे पर आज अगर पाप की फाइल खुली हुई है तो उसका वो कष्ट,दंड तो भोगना ही पड़ेगा।
कुछ ऐसा ही उस लंपट के जीवन पर पड़ेगा क्योंकि अभी उसके पिछले जन्मों के पुण्य कर्मो की फाइल चल रही है इसलिए वर्तमान में पाप करते हुए भी सुख भोग रहा है पर जैसे ही पुण्य कर्म खत्म होंगे तब एक एक पाप की सजा मिलनी भी तय है।
इसलिए याद रखिए कि यह जरुरी नहीं कि आज वर्तमान जीवन के कर्मो का फल इस जीवन में ही मिलेगा-अगर पास्ट कर्मो की फाइल चल रही है तब पहले वो पुरे भोगने होंगे तब उसके बाद की फाइल का क्रमशः नम्बर आएगा।
इसलिए यह ख्याल रहे कि कर्म फल हर हाल में भुगतना पड़ता है

अगली पोस्ट में क्या कुछ उपाय से कर्म फल बदले जा सकते है?

संजय सनम
संपादक फर्स्ट न्यूज़
ज्योतिष परामर्शक
संर्पक सूत्र-72780-27381

टिप्पणियाँ