पिछली पोस्ट में मैंने कर्म फल के सिद्धान्त पर यह इंगित कर ही दिया था कि समस्त कर्म नहीं बदले जा सकते अर्थात उन कर्मो के परिणाम बिना किसी परिवर्तन के हमको भोगने ही पड़ते है पर कुछ कर्म जिनको संचित श्रेणी का कहा जाता है उनमें परिवर्तन किया जा सकता है-ये परिवर्तन पूजा,जाप,अनुष्ठान,दान व् कुछ टोटको के विधान से भी हो सकता है।
ग्रहों के शान्ति के लिए अनेको विधान होते है उसी प्रकार किसी कमजोर ग्रह को बल प्रदान करने की भी विधियां होती है पर इनमें भी सावधानी व् अनुभवी परामर्शक के सान्निध्य की आवश्यकता होती है अन्यथा कई बार परिणाम और अधिक विपरीत आ जाता है।
ग्रहों के लिए स्टोन,पत्थर, व् जड़ी लोग धारण करते है उसी प्रकार ग्रह शान्ति के लिए पूजा विधान,व् उस ग्रह से सम्बंधित वस्तुओं का दान किया जाता है--ये सामान्य बाते है पर इनमें भी सावधानी रखनी चाहिए अन्यथा लेने के देने पड़ जाते है।
जैसे किसी के जन्मांग चक्र में शनि ग्रह कारक है और विपरीत दशा गोचर के कारण अगर जातक परेशानी भोग रहा हो तब कोई अगर कोयले का दान करवा दे या बहते पानी में बहवा दे तब उस कारक शनि का कारक तत्व ही खत्म हो जाता है और उससे मिलने वाले शुभ प्रभाव से जातक वंचित हो जाता है।
अशुभ प्रभाव कैसे बदले जा सकते है ?
जैसे किसी के जन्मांग चक्र में दुर्घटना,चोट,रक्त बहाव की आशंका हो तब उस जातक को अपना रक्त दान की सलाह दी जाती है ताकि जो रक्त बहना होना था वो रक्त ऐसे दे दिया जाता है।
कुछ इसी प्रकार अगर किसी के आने वाले भविष्य में अस्पताल एडमिट होने की आशंका ग्रह सितारों से इंगित हो तब उस जातक को दवाइयों का दान करने व् अस्पताल जाकर मरीजों के साथ समय बिताने व् उनको खाने पीने की सामग्री उपहार देने की सलाह दी जाती है इससे उस जातिका के अस्पताल के समय व् दवाइयों के खर्च का इस रूप में परिवर्तन करके घटना चक्र अर्थात एक रोगी के रूप में अस्पताल में रहने को काफी हद तक बदल लिया जा सकता है।
कुछ इस प्रकार की युक्तियों से कर्म फल में बदलाव किये जा सकते है।
ग्रहों के शान्ति के लिए अनेको विधान होते है उसी प्रकार किसी कमजोर ग्रह को बल प्रदान करने की भी विधियां होती है पर इनमें भी सावधानी व् अनुभवी परामर्शक के सान्निध्य की आवश्यकता होती है अन्यथा कई बार परिणाम और अधिक विपरीत आ जाता है।
ग्रहों के लिए स्टोन,पत्थर, व् जड़ी लोग धारण करते है उसी प्रकार ग्रह शान्ति के लिए पूजा विधान,व् उस ग्रह से सम्बंधित वस्तुओं का दान किया जाता है--ये सामान्य बाते है पर इनमें भी सावधानी रखनी चाहिए अन्यथा लेने के देने पड़ जाते है।
जैसे किसी के जन्मांग चक्र में शनि ग्रह कारक है और विपरीत दशा गोचर के कारण अगर जातक परेशानी भोग रहा हो तब कोई अगर कोयले का दान करवा दे या बहते पानी में बहवा दे तब उस कारक शनि का कारक तत्व ही खत्म हो जाता है और उससे मिलने वाले शुभ प्रभाव से जातक वंचित हो जाता है।
अशुभ प्रभाव कैसे बदले जा सकते है ?
जैसे किसी के जन्मांग चक्र में दुर्घटना,चोट,रक्त बहाव की आशंका हो तब उस जातक को अपना रक्त दान की सलाह दी जाती है ताकि जो रक्त बहना होना था वो रक्त ऐसे दे दिया जाता है।
कुछ इसी प्रकार अगर किसी के आने वाले भविष्य में अस्पताल एडमिट होने की आशंका ग्रह सितारों से इंगित हो तब उस जातक को दवाइयों का दान करने व् अस्पताल जाकर मरीजों के साथ समय बिताने व् उनको खाने पीने की सामग्री उपहार देने की सलाह दी जाती है इससे उस जातिका के अस्पताल के समय व् दवाइयों के खर्च का इस रूप में परिवर्तन करके घटना चक्र अर्थात एक रोगी के रूप में अस्पताल में रहने को काफी हद तक बदल लिया जा सकता है।
कुछ इस प्रकार की युक्तियों से कर्म फल में बदलाव किये जा सकते है।
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