रिश्ते और पूर्व जन्म

क्या पिछले जन्मों के रिश्ते भी इस जन्म में साथ आते है?


क्या पूर्व जन्मों के भावनात्मक आवेग इस जन्म में भी दिखते है?

बड़े रोमांचक तथ्य है पूर्व जन्म के उस बीते जीवन  के इस जन्म के सफर करते हुए लम्हो के। अनुभव साफ कहते  है कि पूर्व जन्म के भावनात्मक आवेग और पूर्व जन्म के रिश्तों के इस जन्म में भी अहसास और मजे की बात यह है कि जिन लोगो ने पास्ट लाइफ थेरपी से अपने पूर्व जन्म को देखा तब वे आश्चर्य चकित से रह गए क्योकि जिस चेहरे को उन्होंने पास्ट लाइफ में देखा उसमे उस चेहरे से वो डरते सहमते दिखे और इस जन्म में भी वो चेहरा उनके साथ है और इस जन्म में भी उसके साथ कोई खास प्रगाढ़ता नहीं है बल्कि बचपन में एक डर सा भाव ही रहा है।
एक और उदाहरण और भी खास रोचक है कि इस जन्म की शरीर की बीमारियों,व्याधियों से भी पिछले जन्म का जुड़ाव रहता है -एक अनुभव ऐसा आया कि एक महिला के पैर में एग्जिमा था और जब वो पास्ट लाइफ थैरेपी ले रही थी तब उसने अपने एक जन्म में अपने उस पैर को सड़ा गला सा देखा था--अब यहाँ थेरपिस्ट की भूमिका अहम हो जाती है क्योंकि उसका मुख्य कार्य पास्ट लाइफ की उन विषमताओं से मुक्ति दिलाना होता है और थेरपिस्ट उस वक्त अपने निर्देश इन कष्ट, विषमताओं को यही पर छोड़कर अपने वर्तमान जीवन में व्यक्ति को लाने का होता है और जब वो व्यक्ति मन से उन पुराने जन्मों के कष्ट से मुक्त हो जाता है तब वे सारी पूर्व जन्म की कष्टकारी स्थितियां इस जीवन व् आगे आने वाले जीवन से दूर हो जाती है।
कुल मिलाकर प्रेम,नफरत,धोखा,सहायता,अच्छा लगना, घृणा सी होना ये सारे तथ्य पूर्व जन्म के संस्कारों से इस जन्म में भी चलायमान रहते है और इनका अच्छा -खराब प्रभाव हमारे जन्म जन्मान्तर तक पड़ता रहता है।

इसलिए आवश्यक है कि हम अपने जीवन की घटनाओं पर मनन चिंतन करे,हम हमारे रिश्तों के व्यवहार पर भी गंभीरता से मनन करे और यह खोजने की कोशिश करे कि नफरत,घृणा की वजह क्या है?
हो सकता है इसका इस जन्म से नहीं पूर्व जन्मों के संस्कारों से सम्बन्ध हो--तब आवश्यक है कि उन दर्दीली स्मृतियों को इस जन्म से रफा- दफा किया जाये ताकि वर्तमान जीवन को सुकून मिल सके और दर्द की उन पुरानी गठरियों को छोड़ा जा सके।

संजय सनम

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