प्रायः हर एक का सवाल यह होता है कि उसका गोल्डन पीरियड अर्थात स्वर्णिम समय कब?
और इस वक्त का इंतजार रहता है हर एक इंसान को---कुछ लोगों के जीवन में बाल्य अवस्था में आ जाता है तब वो अपने दम पर कुछ करने की उम्र में ही नहीं होते पर उस उम्र में वो जिंदगी के श्रेष्ठ सुविधा को भोग जरूर करते है-बचपन इतना सुखद गुजरा होता है कि उसको बाद के जीवन में जब तब याद आता रहता है।क्योंकि गोल्डन पीरियड बचपन से युवावस्था के आते आते गुजर चुका होता है और वैसा वक्त पाने के लिए बाद की जिंदगी में तरस से जाते है।
कुछ लोगों के जीवन में युवावस्था के साथ ही आ जाता है और उनके करियर में ऐसी छलांग लगा देता है कि लोग सोचते रह जाते है--और कुछ लोगो के जीवन में मध्य आयु के बाद आता है और संघर्ष भरे आधे जीवन को बाद में सुख की छाँव देता है-कुछ लोगों के जीवन के साँझ अर्थात बुढ़ापे में आता है अर्थात जातक जीवन भर अपने परिवार के लिए संघर्ष करते हुए जब बुढ़ापे में आ जाता है तब उसकी संतान की समृद्धि व् उनकी सेवा भावना से ता जिंदगी के उस संघर्ष के ज़ख्मो को मरहम मिलता है।
और कुछ लोग तो गोल्डन का इंतजार करते करते प्रयाण भी कर जाते है अर्थात यह गोल्डन वक्त कब आएगा? और आएगा ही यह निश्चित नहीं होता पर कुशल ज्योतिष परामर्शक जन्मांक चक्र के सितारों को पढ़कर यह बता सकता है कि जातक के भाग्य में गोल्डन पीरियड है अथवा नहीं।
गोल्डन पीरियड जातक के जन्मांक चक्र में उसकी समृद्धि,यश, भौतिक सुख सुविधा,मन का सुकून अर्थात चहुमुखी प्रगति की तस्वीर होती है और जब यह वक्त आता है तब दरिद्रता को जाना पड़ता है-सब कुछ आश्चर्य जनक रूप से बदल जाता है--सड़क का राहगीर महलो का मालिक बन जाता है-लोग जिससे पहले बात करने से कतराते रहते थे अब वे खुद बात करने के लिए तरसते दिखते है अर्थात जिसकी अनदेखी की जाती थी अब उसकी हाजरी बजाई जाती है---इसे कहते है जिंदगी का स्वर्णिम काल अर्थात गोल्डन पीरियड।
जीवन उतार चढ़ाव का नाम है--कभी जब वक्त मेहरबान होता है तब कोयले की खान में हाथ डालने पर
जब जिंदगी की किताब में वक्त की ऐसी मेहरवानी का पन्ना ज्योतिष परामर्शक के सामने आ जाता है तब वो भी इस पन्ने को गोल्डन पीरियड कह कर संबोधित करता है अर्थात जीवन का सर्वश्रेष्ठ वक्त।कोयले की कालिख नहीं आती बल्कि हीरा निकल आता है अर्थात जो भी और जैसे भी किया गया काम भी आश्चर्यजनक रूप से कामयाबी का तोहफा लेकर आता है और हैरानी की बात तब और लगती है जब वो ही काम कोई दूसरा उसी तरह कर रहा हो पर उसको नकारात्मक परिणाम मिलता है अर्थात बूरी तरह पिट जाता है पर जिस पर वक्त मेहरवान होता है वो तुफानो में भी सावन के गीत गाता हुआ दिखता है क्योंकि तूफान औरो के लिए तूफान होते है पर उसके लिए तो वे भी सावन के झूले से बन जाते है।
और इस वक्त का इंतजार रहता है हर एक इंसान को---कुछ लोगों के जीवन में बाल्य अवस्था में आ जाता है तब वो अपने दम पर कुछ करने की उम्र में ही नहीं होते पर उस उम्र में वो जिंदगी के श्रेष्ठ सुविधा को भोग जरूर करते है-बचपन इतना सुखद गुजरा होता है कि उसको बाद के जीवन में जब तब याद आता रहता है।क्योंकि गोल्डन पीरियड बचपन से युवावस्था के आते आते गुजर चुका होता है और वैसा वक्त पाने के लिए बाद की जिंदगी में तरस से जाते है।
कुछ लोगों के जीवन में युवावस्था के साथ ही आ जाता है और उनके करियर में ऐसी छलांग लगा देता है कि लोग सोचते रह जाते है--और कुछ लोगो के जीवन में मध्य आयु के बाद आता है और संघर्ष भरे आधे जीवन को बाद में सुख की छाँव देता है-कुछ लोगों के जीवन के साँझ अर्थात बुढ़ापे में आता है अर्थात जातक जीवन भर अपने परिवार के लिए संघर्ष करते हुए जब बुढ़ापे में आ जाता है तब उसकी संतान की समृद्धि व् उनकी सेवा भावना से ता जिंदगी के उस संघर्ष के ज़ख्मो को मरहम मिलता है।
और कुछ लोग तो गोल्डन का इंतजार करते करते प्रयाण भी कर जाते है अर्थात यह गोल्डन वक्त कब आएगा? और आएगा ही यह निश्चित नहीं होता पर कुशल ज्योतिष परामर्शक जन्मांक चक्र के सितारों को पढ़कर यह बता सकता है कि जातक के भाग्य में गोल्डन पीरियड है अथवा नहीं।
गोल्डन पीरियड जातक के जन्मांक चक्र में उसकी समृद्धि,यश, भौतिक सुख सुविधा,मन का सुकून अर्थात चहुमुखी प्रगति की तस्वीर होती है और जब यह वक्त आता है तब दरिद्रता को जाना पड़ता है-सब कुछ आश्चर्य जनक रूप से बदल जाता है--सड़क का राहगीर महलो का मालिक बन जाता है-लोग जिससे पहले बात करने से कतराते रहते थे अब वे खुद बात करने के लिए तरसते दिखते है अर्थात जिसकी अनदेखी की जाती थी अब उसकी हाजरी बजाई जाती है---इसे कहते है जिंदगी का स्वर्णिम काल अर्थात गोल्डन पीरियड।
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