कदम जब थक जाये----


होता है अक्सर---

चलते--चलते  लगता है जैसे

रास्ते और लंबे दूर दूर तक  विस्तारित  दिखते है

और मंजिल को हर कदम के साथ और दूर देखकर

जब मन थक जाता है---तब कदम भी जैसे जबाब दे देते है---

किस्मत कनेक्शन यहां भी है----

बाधा,रुकावट,और मन को मारने वाला---

आपको सफर और लंबा दिखाने वाला

मंजिल का अता पता तक न बताने वाला

और तब आ जाती है निराशा

जो लाती है थकावट

और रुक जाते है कदम

और चुक जाती है मंजिल----

इसलिए चलने से पहले सोच कर चलिए

बीच सफर में कदमों को न रोकना पड़े

इसलिए सारे विकल्प जोड़ कर चलिए--

कदम नहीं थकते

मन कमजोर होता है

और मन की इस बीमारी को तोड़ कर चलिए--

मंजिल आसान नहीं होती?

पर ना मुमकिन भी नहीं होती--

वो उनके कदमो को चूमती है

जो उसे महबूबा की तरह पाने के लिए निकलते है

एक ऐसे महबूब की तरह

जो अपनी प्रेयसी के लिए कुछ भी कर सकता है

कुछ भी----

जिसे प्यार की भाषा में  दीवानगी कहते है

मंजिल के प्रति प्यार -पागल प्रेमी सा जब होता है

तब मंजिल खुद दौड़ कर आती हुई दिखती है

इसलिए अपने लक्ष्य को माशूका बनाइये अपनी

और फिर प्यार और उसे पाने की हर हद कर दीजिए पार----

तब न तो थकेगा मन और न ही  रुकेंगे कदम।

किस्मत मजबूत हो इसके लिए मन मजबूत होना भी जरुरी है।




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