ग्रहों के उपचार में सावधानी आवश्यक है।

ग्रहों के उपचार में चूक कहा होती है


हमारे जन्मांग चक्र के ग्रहों में कुछ शुभ तो कुछ  अशुभ होते है और उनका प्रभाव उनकी दशा,अंतर,प्रत्यंतर,सूक्ष्म अंतर में हमको अच्छा- बुरा मिलता है।

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उपचार अशुभ ग्रहों का होता है तो कभी कभी शुभ ग्रहों को पावर दिए जाने की आवश्यकता भी पड़ती है जैसे कोई ग्रह हमारे लिये शुभ तो है पर वो कमजोर अंशो में होने की वजह से दुर्बल है इसलिए वो अपनी शुभता का श्रेष्ठ प्रदर्शन नहीं कर पाता जिसकी वजह से हमको उस ग्रह के दुआरा जितने शुभ फल मिलने चाहिए उस हिसाब से शुभ फल नही मिलते ,!

तब उस ग्रह को स्टोन के दुआरा,रंग थैरेपी या मंत्रों से शक्ति दी जाती है।पर यहां पर भी कई बार चूक हो जाती है कुछ ज्योतिष शुभ ग्रह की कारक वस्तुओं का जब दान करवा देते है तब उस शुभ ग्रह की शक्ति को ही खत्म कर देते है इसलिए यह सावधानी शुभ ग्रहों को औऱ अधिक शुभ बनाने के वक्त ध्यान रखनी आवश्यक होती है।

अति सर्वत्र वर्जयते: यह नियम यहां पर भी लागू होता है बहुत अधिक शक्ति का शुभ ग्रह भी श्रेष्ठ नही होता क्योकि अगर गुरु ग्रह को शक्ति सम्पन्न होने के बाद औऱ अतिरिक्त शक्ति दी जाए तो यह गुरु फिर जातक के अंदर ज्ञान,व प्रतिष्ठा का अहम ला देता है जिसकी वजह से जातक को बाद में प्रतिकूल परिणाम भुगतने पड़ते है।

कुछ ऐसा ही सूर्य में अगर हो जाये तो जातक अपना अतिरिक्त रोब जमाने की कोशिश करता है और बाद में विपरीत परिणाम मिलते है।
बुध में जातक बात चीत में अधिक होशियारी दिखाता है और पकड़ा जाता है कुछ इसी प्रकार व्यापार में अधिक चतुराई दिखाता है और मुंह की खाता है।
शुक्र की अतिरिक्त मजबूती काम वासना के ज्वार को उमड़ा  सकती है और जातक सुंदरियों के चंगुल में खुद को फंसा हुआ महसूस करता है जिससे धन व यश की हानि होने की संभावना बनती है।
राहु को अतिरिक्त पावर अगर मिल जाये तो फिर अरमान ही भड़क जाते है और व्यक्ति अपनी इच्छा को पूरी करने के लिए किसी भी हद तक उतर  सकता है।
केतु  विच्छेदात्मक ग्रह है इसकी अतिरिक्त शक्ति यह जिस स्थान,राशि मे होता है उसमें विच्छेद पैदा कर सकती है फलस्वरूप उस स्थान,भाव के लाभ खत्म से हो जाते है।
जहां तक शनि महाराज का सवाल है इनकी अतिरिक्त शक्ति व्यक्ति को संघर्ष देती है--शारीरिक मेहनत और उसके बाद संघर्ष की मात्रा को बढ़ा देती है।
इसलिए ग्रहों का शक्ति सम्पन्न होना तो उचित है पर अतिरिक्त पावर शुभ फलप्रद ग्रहों में भी नकारात्मक गुण दे देता है इसलिए शुभ ग्रहों को भी अतिरिक्त पावर देने के लिए बेवजह स्टोन धारण करने से बचना चाहिए।यह कतई जरूरी नही है कि कोई ग्रह जन्म कुंडली मे कारक है तो उसका स्टोन धारण करना ही होगा।अगर वो ग्रह अपने  अच्छे अंशो में है तो फिर वो अपने आप मे कुदरती स्वस्थ है फिर उसको बेवजह की  दवा देने की कोई आवश्यकता नही है। ग्रह के अनुसार मंत्र जाप हमेशा श्रेष्ठ फल देता है।

- संजय सनम( PLEASE LIKE,SHARE,FOLLOW...)

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