जन्म कुंडली मे अमीर होने के योग न हो तब क्या कर्म से अमीर नही हुआ जा सकता.....
-संजय सनमभाग्य की अपनी प्रधानता है और कर्म की अपनी सीमा है..अगर भाग्य में धन आना लिखा है तो बहुत कम मेहनत व कई बार तो अकर्म के बावजूद भी अच्छा धन मिल जाता है।ठीक इसी प्रकार अगर धन प्राप्ति भाग्य में प्रबल नही है तो बहुत अधिक मेहनत करने के बाद भी आपके पास संचित धन नही हो सकता इसलिए भाग्य की प्रधानता को स्वीकार करना ही पड़ता है पर अगर आप कर्मशील रहते है तो पुरुषार्थ की भी अपनी भूमिका व कुछ अधिकार होते है आप संचित बहुत अधिक धन नही कर सकते पर जीवन यापन अच्छी तरह से कर सकते है।
आपके पास धन होने के लिए आपके जन्मांग चक्र में भाव,ग्रह,युति,नक्षत्रों की स्थितियां व उनके साथ योगकारक ग्रहों की दशा का आपके जीवन मे आना अति आवश्यक होता है।धन संचय अर्थात बैंक बैलेंस में कुंडली का दूसरा भाव महत्वपूर्ण होता है,इसी तरह 6 भाव लोन, ऋण से प्राप्त धन व आपके क्लाइंट,ग्राहक से आया धन होता है,10 वा भाव धन प्राप्ति के लिए आपके कर्म क्षेत्र को इंगित करता है यहां से प्रमोशन,स्टेटस की छलांग को भी देखा जाता है लेकिन इन 2,6,10,भावों के साथ लाभ भाव 11 का जुड़ना सोने में सुहागा होता है क्योंकि यह भाव इच्छाओं के पूर्ण करने की गारंटी देता है पर यह ध्यान रहे कि चर लग्नो में यह 11 भाव बाधक भी होता है इसलिए एक सिद्धान्त पूर्ण रूप से सब पर फलित नही होता।
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