हम शिक्षा कुछ लेते है और कर्म दूसरा करते है...क्या जन्म कुंडली के ग्रह भाग्य बताते है!
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-संजय सनम
आपके इस सवाल को समझने के लिए आपको भाग्य को समझना होगा…..भाग्य क्या है! आज का कर्म भाग्य कुछ अंश तक हो सकता है पर मूलतः पूर्व जन्मों के कर्म अर्थात प्रारब्ध ही भाग्य है।
आप जिस पल जन्म लेते है उसकी ग्रह स्थितियां आपके पूर्व जन्मों के कर्म के आधार पर ही बनी होती है जिनको आप -हम सब भोगते है या यूं कहिए कि भुगतान करते है।
कर्मो की भी अपनी स्थिति अपने स्वरूप है-कुछ कर्म ऐसे होते है जिनको हम एक अंश भी नहीं बदल सकते अर्थात उनको उसी रूप में अच्छा या बुरा भोगने के लिए हम विवश होते है।
कुछ कर्म ऐसे होते है जो दृढ़ नही होते उनमें अपने पुरुषार्थ या कर्म के दुआरा परिवर्तन करने का अधिकार नियति देती है..बस यही हमारा पुरुषार्थ कुछ नया लिख सकता है आने वाले जीवन के लिए ।
हमारे मन,विचार से जो कर्म अच्छे या बुरे बनते है वे मानसिकता के रूप में इस जन्म अर्थात वर्तमान व भविष्य अर्थात अगले जन्म का दृढ़ प्रारब्ध तक बन जाते है।
नियति हमारी हमारी सोच,हमारे कर्मो से ही बनती है और जो नियति के पन्नों पर लिखा होता है वो ही होता है…यह सच है कि भाग्य हमारे कर्मो का प्रतिफल है इसलिए भाग्य के निर्माता हम ही होते है और उन कर्मो के आधार पर फलों की गणित नियति के पास होती है जिसके हम अधीन होते है।
यह नियति का ही फल है कि हम शिक्षा कुछ और ग्रहण करते है और कर्म कुछ और कर रहे होते है क्योंकि हमारे ग्रह उस शिक्षा से हमारी आय को नही बनाते फलतः हमको दूसरे क्षेत्र में नियति ले जाती है।
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