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जन्मांग चक्र का 5 वा भाव धन कहा से देता है!

जन्म कुंडली का पांचवा वा भाव धन लाभ कैसे और कब देता है

 

SANJAY SANAM

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हमको धन कितना मिलेगा-कब मिलेगा और कैसे मिलेगा! यह सब कुछ हमारे जन्मांग चक्र के ग्रह नक्षत्र ,महादशा,अंतर,प्रत्यंतर,सूक्ष्म ,प्राण अंतर व गौचर तय करता है।

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धन प्राप्ति के मूल भाव यद्दपि दूसरा,षष्टम,दशम,व एकादशं को कहा गया है पर कुंडली के शेष भाव भी अगर इन मूल भावों से जुड़ाव रखते है तो वे अपने भावों के आधार पर धन देने का फल प्रदान करते है।

Amar ujala

आज हम 5 वे भाव अर्थात पंचम जिसको ज्योतिष में त्रिकोण भी कहा जाता है उसका विवेचन धन प्राप्ति के संदर्भ में करेंगे।

पंचम भाव प्रथम संतान का कारक है इसलिए आपको संतान से धन लाभ होने को इंगित करता है पर उसका जुड़ाव धन के मूल भावों से नक्षत्र,उपनक्षत्र,व उप उप नक्षत्र से होना चाहिए।

पंचम भाव बुद्धिमता का भाव है जिन्हें आप बौद्धिकता भी कह सकते है कुछ लोगो के पास शेक्षणिक डिग्री नही होती पर उनकी बौद्धिकता उस डिग्री से भी ऊपर होती है इसलिए ये लोग अपने अपने क्षेत्र में कंसलटेंसी सफलता के साथ करते है इस प्रकार पंचम भाव कंसलटेंसी से धन लाभ को इंगित करता है उसमें डॉक्टर्स,चार्टेड,वकील,ज्योतिष परामर्शक, हीलिंग,वास्तु, मोटिवेशनल,स्पीच थेरेपी वाले ,धर्म उपदेशक व अन्य वे सभी जो परामर्श देते है इस श्रेणी में आ जाते है।

पंचम भाव का कला क्षेत्र-Filmi beat

पंचम भाव कला,अभिनय,डांस मनोरंजन क्षेत्र,इवेंट्स,मॉडलिंग में भी मुख्य होता है इन क्षेत्रों में कार्य करने वाले पंचम भाव से ही धन कमाते है।

पंचम भाव देह व्यापार का भी संकेत है वैसे मनोरंजन क्षेत्र में आजकल यह आम बात है पर पंचम का सप्तम से जुड़ाव होकर अगर एकादशं से लिंक हो जाये और साथ मे द्वाद्वश वा भाव शया सुख का भी जुड़ जाए तो यह अपने कर्म क्षेत्र में प्रत्यक्ष,अप्रत्यक्ष सेक्स को ले आता है और उससे उनके कर्म क्षेत्र को लाभ या धन की आय हो जाती है।

यही पंचम भाव अगर आठवें औऱ द्वादश भाव से ही जुड़े इसमे एकादश न आये तो फिर यह स्केंडल,मान हानि,धन हानि का रूपक भी बन जाता है।

पंचम भाव षष्टम अर्थात रोग भाव से द्वादश वा भाव होता है अर्थात यह आरोग्य प्रदान करने वाला होता है इसलिए स्वास्थ्य को आरोग्य प्रदान करने वाली तकनीकि जैसे योग,मैडिटेशन से भी धन लाभ का कारक बनता है।

पंचम भाव का खेल क्षेत्रGoogle


पंचम भाव स्पोर्ट्स अर्थात खेल का होता है इसलिए समस्त खेल व उनसे प्राप्त लाभ, अर्थात धन की आय इस भाव से जुड़ने की वजह से ही होती है।पंचम भाव सप्तम अर्थात जीवन साथी या व्यापारिक साझेदार से एकादश होता है इसलिए जब पंचम भाव की दशा चल रही होती है तो पत्नी के नाम से किया गया कार्य अधिक लाभप्रद हो जाता है।

पंचम भाव पर एकादश भाव की पूर्ण दृष्टि होती है इसलिए इस भाव पर मित्रों का बहुत अधिक प्रभाव पड़ता है अगर संयोग अच्छे हो तो जातक को मित्र निहाल कर देते है अर्थात लाभ के दरवाजे मित्रों की वजह से ही खुलते है।

पंचम भाव का सम्बंध लग्न से होकर अगर नवे भाव से हो जाये तो फिर वो जातक कही काम नही करता वो न तो नोकरी करता है न ही व्यवसाय भी करता है क्योकि ये दोनों भाव नोकरी से बारहवां,व व्यापार कर्म क्षेत्र से भी बारहवां हो जाता है इसलिए जातक को निठल्ला ही बना देता है।

पंचम भाव शेयर मार्किट पर Navbharat times

पंचम भाव सट्टेबाजी से लाभ का कारक बनता है अगर पंचम भाव का दशम व एकादश से संयोग हो तथा अष्टम व द्वादश वा भाव इस कनेक्शन में न आये तो शेयर बाजार सहित अन्य तरह की सभी सट्टेबाजी गतिविधि से अच्छा लाभ प्राप्त होता है ।

पंचम भाव घुड़ दौड़ में कारक Danik jagran

इसमे हॉर्स रेसिंग,लॉटरी, कार्ड्स अर्थात ताश पत्ती के खेल अर्थात एक तरह से जुए की गतिविधि भी आ जाती है पर पंचम के साथ अगर अष्टम व द्वादश जुड़ गए तो लाभ के स्थान पर जो अपना होता है वो भी चला जाता है इसलिए सट्टेबाजी में पांचवे वे भाव के साथ षष्टम -दशम- एकादशं का सम्बंध बहुत फलदायक हो जाता है यहां लाभ की मात्रा प्रचुर हो जाती है

आलेख के साथ दी गई वीडियो लिंक को भी ध्यान से सुनिये जिसमे 5 वे भाव से धन कहाँ कहाँ से आ सकता है उस पर तार्किक रूप से समझाने की कोशिश की गई है।अगर आपको यह आलेख अच्छा लगा हो तो कमेंट बॉक्स पर आकर अवश्य सूचित करें तथा लाइक व शेयर के साथ मुझे फॉलो करना भी न भूले।

- संजय सनम

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