ज्योतिष का षष्ठम भाव कहाँ से धन लाभ देता है
जन्मांग चक्र में षष्ठम भाव धन के प्रमुख भावों में से एक माना जाता है क्योकि यह सप्तम अर्थात आपके सामने वाले का द्वादश भाव होता है अर्थात उसका खर्च और आपका लाभ होता है इसलिए धन भावों में यह मुख्य कहा जाता है।क्योकि आपको लाभ तभी मिलेगा जब आपके सामने वाले से आपको धन मिलेगा अर्थात वो खर्च करेगा इसलिए ज्योतिष में षष्ठम भाव की मजबूती धन प्राप्ति का मजबूत स्रोत मानी जाती है।
अब सवाल यह है कि षष्ठम भाव से किन किन क्षेत्रों से आपके पास धन आ सकता है!आप व्यापार कर रहे है और आपका षष्ठम भाव मजबूत है तो नियमित रूप से आपको ग्राहक मिलेंगे अर्थात आय बनी रहेगी।यह भाव कानूनी क्षेत्र का प्रतिनिधित्व भी करता है इसलिए जातक सफल अधिवक्ता बन कर धन की अच्छी आय करता है -षष्ठम भाव शत्रु विजेता का भी होता है यहां कानूनी,चुनाव इत्यादि में उस जातक की विजय होती है। षष्ठम भाव शत्रु से लाभ प्रदान करवाने में सहायक होता है क्योकि वो शत्रु का द्वादश होता है इसलिए उसका खर्च या पराजय इस जातक के लिए लाभ व विजय बनती है।
षष्ठम भाव रोग का भी होता है इसलिए डॉक्टर्स के धन को भी यहां से देखा जाता है क्योकि रोग की चिकित्सा डॉक्टर्स ही तो करते है। षष्ठम भाव सर्विस का होता है जो लोग नोकरी करते है उनका कही न कही षष्ठम भाव एक्टिव होता है अब अगर इसका दशम,व एकादश से जुड़ाव हो जाये तो फिर प्रमोशन,स्टेटस,अर्थात उच्च पद प्राप्त होते रहते है इसके अलावा कुछ अन्य सेवाएं जिनमे जातक नोकरी तो नही करता पर वो सर्विस सेक्टर की वो सेवाएं प्रदान करता है वे भी इस भाव का प्रतिनिधित्व करती है।
षष्ठम भाव ऋण का भी होता है इसलिए इस भाव की मजबूती वाले जातकों को ऋण बहुत आसानी से औऱ अपेक्षा के अनुरूप मिल जाता है।
षष्ठम भाव मामा का भी होता है इसलिए इस भाव की मजबूती कही न कही जातक को मामा से अर्थात ननिहाल से लाभ प्रदान करती है।



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