घर के मुख्य दरवाजे पर चौखट की महत्ता को समझिए
बड़े बुजुर्गों के जमाने मे वास्तु का ज्ञान और उसके आधार ही निर्माण तथा मुख्य सावधानियां घर मे न सिर्फ बुजुर्ग पुरुष बल्कि बुजुर्ग महिलाओं को भी रहती थी इसलिए वो चाहे रसोई में चूल्हा कहाँ जलेगा !यह ध्यान घर की बड़ी महिलाएं खुद रखती थी तथा खास बात यह भी है कि उस वक्त मकान का निर्माण करने वाले मुख्य कारीगर, मिस्त्री भी प्राचीन वास्तु की मुख्य जानकारियां खुद रखते थे तथा उसी के अनुसार निर्माण भी करते थे।
घर की ड्योढ़ी अर्थात मुख्य दरवाजा अत्यंत महत्वपूर्ण होता है क्योकि घर के अंदर आने वाली ऊर्जा फिर वो पॉजिटिव हो या नेगेटिव यही से मुख्य रूप से आती है इसलिए पहले के जमाने मे जब घर मे छत डाली जाती थी या मुख्य दरवाजे पर चौखट लगाई जाती या फिर रसोई में चूल्हा फिट किया जाता तब कुछ विशेष शगुन की रस्म भी अदा की जाती थी।
पहले मुख्य दरवाजे पर चौखट हुआ करती थी जो अब तिखहट का रूप बनती बनती विलीन सी ही हो गई है।चौखट होने की पीछे रहस्य क्या था---कितने ग्रहों की किस रूप में दुहाई दे कर उनसे शांति मांगी जाती थी और उसका कितना बड़ा प्रभाव घर की शांति,समृद्धि,प्रेम ,मेलमिलाप पर पड़ता था।मुख्य दरवाजे पर अगर आपने शांति,समृद्धि,प्रेम का उपाय कर लिया तो फिर आपके घर का वास्तु अपने आप मे मजबूत हो गया।
आइये जानते है कि चौखट किसे कहते है और उसके होने के लाभ क्या होते थे--जो आज नही हो रहे क्योकि हम चौखट लगाते नही तथा अगर लगाते है तो उसकी स्थापना के समय वो उपाय नही करते जो घर को अमंगल से बचा सकता है।
चौखट अर्थात लकड़ी की चार बल्लियों का एक फ्रेम जो मुख्य दरवाजे पर फर्श को भी ऊंचा करके लकड़ी का बल्लम लगाया जाता था।यह बल्लम फर्श से सटा रहता था इसका प्रयोग शनि के रूप में राहु के बुरे प्रभाव को रोकने के लिए किया जाता था।
पहले के दौर में जब भी नई नवेली बहु,या नई वस्तु, घर के अंदर आती या लाई जाती थी तब उस वक्त चौखट के दोनों तरफ सरसो का तेल गिराया जाता था और इस टोटके से राहु को शनि का वास्ता दिया जाता था कि तुझे तेरे गुरु अर्थात शनि की कसम है कि कोई गड़बड़ मत करना- अर्थात राहु को शनि से बांध दिया जाता था।
जब नई नवेली बहु आंगन में प्रवेश करती थी तो माँ जोड़े के सर से पानी अर्थात चंद्रमा को वार कर पानी कुछ पी लेती थी और कुछ उस दहलीज पर गिरा देती थी उस वक्त इस क्रिया से राहु को चन्द्र का वास्ता दिया जाता था ताकि राहु किसी तरह का भूचाल नही करे और इसके साथ दरवाजे के ऊपर लाल धागे से तोरण बांध कर यहां मंगल अर्थात सेनापति का पहरा बिठा दिया जाता था।
आज के दौर में अब चौखटे ही कहाँ रही और मुश्किलों,अमंगल से बचाने वाली ये प्रक्रियाएं ही उनके साथ खत्म हो गई ।प्राचीन परंपराओं से किस तरह ग्रह शान्ति के उपाय वास्तु के साथ कर दिए जाते थे अब वो ग्रह अपना नकारात्मक प्रभाव जब दिखाते है तब वास्तु के लिए तोड़ फोड़,बदलाव के बाद भी शांति ,सुकून नही मिलता।
इसलिए घर के मुख्य दरवाजे की चौखट की महत्ता व उसके विधान को समझना बहुत जरूरी है।आवश्यकता है कि हम अपनी प्राचीन परंपराओं का पुनः अनुसरण करते हुए सुख,समृद्धि,शांति को प्राप्त करे।
आधार स्रोत- सोशल मीडिया



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