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किस्मत बनती कैसे है!

किस्मत किसे कहते है और वो बनती कैसे है

किस्मत जिसे तकदीर भी कहते है - कुछ लोग वक्त अर्थात समय भी कहते है-समय अर्थात वक्त अगर आपके साथ हो इसका मतलब आपकीं किस्मत अर्थात तकदीर आपके साथ है फिर मुश्किल से मुश्किल काम स्वतः आसान हो जाता है- आपके घुर विरोधी आपके कदमो में आ कर आपके नाम की माला जपने लगते है-तकदीर अर्थात आपके ग्रह नक्षत्र आपका साथ दे तब आप कोयले में भी हाथ डालेंगे तो भी आपको हीरे ही मिलेंगे और आपके हाथ भी काले नही होंगे।

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अब सवाल यह है कि यह तकदीर होती क्या है- यह बनती कैसे है? किसी के लिए इतनी अच्छी और किसी के लिए संघर्ष वाली क्यों होती है!

किस्मत की गणित बिना किसी भेदभाव के बहुत सरल है यह कर्मफल के सिद्धांत से बनती बिगड़ती है और उसी आधार पर हमको फल देती है अब इसके लिए हमे कर्म को थोड़ा समझना पड़ेगा -कर्म सिर्फ वो नही जो शरीर से हम मेहनत करते है पसीना बहाते है अगर शारीरिक मेहनत व पसीने की कीमत कर्मफल के सिद्धांत पर होती तो फिर बोझ ढोने वाले लोगों के ही सबसे अधिक मेहनत के कर्म होते और उनको ही सबसे अधिक किस्मत के फल मिलते।


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दरअसल किस्मत के कर्म तो हमारी सोच अर्थात वृति से बनती है अर्थात अच्छी सोच से अच्छे कर्म व गलत सोच से पाप कर्म इसके लिए कुछ करना ही आवश्यक नही होता जैसे किसी की तकलीफ को देख कर अगर उसके प्रति आपके मन मे यह भाव आ जाये कि हे भगवान इसके कष्ट दूर कर दीजिए तो आपकीं उतनी सी ही सोच आपके पुण्य कर्म की तलपट में चली जायेगी और इसी प्रकार अगर किसी के लिए मन मे गलत विचार मात्र ही आ गए तो आपकीं वो सोच आपके पाप कर्म का कारक बन कर उस तलपट में चढ़ जाएगी। भले ही आपने शरीर से किसी के लिए अच्छे या बुरे कार्य अर्थात क्रिया नही की सिर्फ भावना ही आई है तब भी आपके पुण्य व पाप कर्म के खांचे में वो स्वतः चले जायेंगे।

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विधाता अर्थात नियति के कम्प्यूटर में कही कोई हेरफेर नही कर सकता और न ही किसी तरह का भेदभाव ही चलता है आप जैसा सोचेंगे वैसे आपके कर्म बनेंगे इसलिए बहुत आवश्यक है कि हम सोच क्या रहे है इस पर सचेत रहे क्योकि इंसान कुछ करने से पहले सोचता है और जो वो बार बार सोचता है फिर वो किसी न किसी रूप में करने की सफल या असफल कोशिश भी करता है इसलिए हमारी किस्मत अच्छी बने उसके लिए हमारी सोच मंगलमय होनी चाहिए।हमारी सोच से ही कर्म बनते है और कर्म से ही किस्मत बनती है इसलिए अच्छी किस्मत बनाने के लिए अभी से ही अच्छी सोच,नेक विचार,सकारात्मक मिजाज और अंदाज बनाना शुरू कीजिए ताकि आने वाले भविष्य या फिर अगले जन्मों में किस्मत की मेहरबानी मिल सके।

अच्छी किस्मत से फिर हाथ मे रेखाएं अच्छी बनेगी व आपकीं जन्म कुंडली मे ग्रह,नक्षत्रों की उपस्थिति स्वतः ही अनुकूल होगी- जब वक्त हमारा सहयोगी होगा तब जो चाहेंगे वो मिलेगा - मंजिल खुद कदमो पर होगी।इसलिए कर्मफल के सिद्धांत से पहले कर्म बनते कैसे है इसकी जानकारी आवश्यक है और थोड़ी सी सतर्कता हमारी सोच को सही बनाकर कर्म अच्छे बनवा सकती है इससे किस्मत स्वतः ही अच्छी बन जाती है।

- संजय सनम( ज्योतिष परामर्शक)


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