कितना महत्वपूर्ण है जन्म कुंडली का नवम भाव
नवम भाव से धन :
हमारे जन्मांग चक्र में नवम भाव अर्थात भाग्य का भाव अर्थात आपका भाग्य कितना प्रबल है वह यह भाव बताएगा--भाग्य का अर्थ जिंदगी के ऐश आराम का खजाना अर्थात भाग्य जितना प्रबल उतना ही जीवन सुख,समृद्धि की डगर पर चलेगा।
वैदिक ज्योतिष में यह त्रिकोण भाव कहा जाता है जिसे अत्यधिक शुभफल प्रदाता कहा गया है।अब आइये जानते है कि नवम भाव मुख्य रूप से किस किस क्षेत्र में लाभ विशेष रूप से प्रदान करता है--
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- यह भाव उच्च शिक्षा का है अगर इसके साथ दशम,एकादश भाव का संयोग नक्षत्र,उप नक्षत्र से बन जाये तब फिर उच्च शिक्षा प्रदान कर फिर उस शिक्षा से धन व पद का लाभ मिलता है।
- नवम भाव विदेश का है -जो जातक विदेश में रह कर धन कमा रहे है उनके जन्मांग चक्र में नवम भाव एक्टिव है अर्थात उनका भाग्य विदेश में उदय हुआ है और वहां से वे जीवन की समृद्धि को भोग रहे है।
- नवम भाव धर्म का है धर्मगुरु,कथा वाचक के जन्मांग चक्र में भी नवम भाव को आप एक्टिव देखेंगे--उनको यहां से धन,यश का लाभ यह नवम भाव देता है।जो संत दौलत से दूर रहते है उनके लिए नवम भाव ध्यान साधना में उच्च स्थिति तक पहुंचा देता है।
- नवम भाव से जुड़े जातक धर्म की सभा संस्थाओ से जुड़े हो सकते है तथा वहां से धन,पद का लाभ प्राप्त करते है।नवम भाव की मजबूती गुरु कृपा अर्थात गुरु का सान्निध्य व उनका आशीर्वाद प्रदान करती है कई बार दुर्लभ संतो की दुर्लभ सिद्धियां भी नवम भाव की प्रबलता की वजह से जातक को मिल जाती है।
- जिनका नवम भाव प्रबल होता है उनकी तीर्थाटन अर्थात धार्मिक यात्राएं प्रचुर होती है अर्थात धर्मिक क्षेत्र,स्थान उनको आकर्षित करते है तथा वे पुण्य का लाभ भी प्राप्त करते है।
- नवम भाव पिता का कारक है--पिता का सुख,पिता से धन,जमीन लाभ-अगर नवम भाव शुभ स्थिति में हो तब पिता से सम्बंध भी अच्छे रहते है और उनसे लाभ भी मिलता है।
- नवम भाव जिनका विशेष मजबूत होता है उन पर दैवीय शक्तियों की कृपा भी रहती है क्योकि यह जातक उनकी आराधना में मन से लगा रहता है।नवम भाव से लाभ प्राप्त करने वाले वे सभी ब्राह्मण होते है जो मंत्र,पूजा,हवन करते है।
- अगर नवम का पंचम औऱ एकादश के साथ सम्बन्ध हो जाये तो प्रथम संतान से लाभ व पति या पत्नी के बड़े भाई से लाभ को भी बताता है।
- अगर किसी का भाग्य भाव बहुत अधिक प्रबल हो तथा लग्न व पंचम के साथ जुड़ाव हो तो फिर ऐसा व्यक्ति कुछ भी कार्य जीवन यापन के लिए नही करता उसका जीवन फिर भी चलता जाता है।
- नवम भाव आपके आरोग्य अर्थात शरीर सुख का भी है शरीर की स्वस्थता को पंचम व नवम भाव ही परिपूर्ण करता है अगर किसी के जन्मांग चक्र में लग्न के साथ पंचम व नवम का सयोंग हो और ये ग्रह षष्ठम,अष्टम व द्वादश से जुड़े न हो तब फिर ऐसे व्यक्ति को शरीर सुख चरम रूप से मिलता है अर्थात काया निरोगी होती है।
- नवम भाव सप्तम से तीसरा होता है अर्थात यहां पर आपके जीवन साथी के छोटे भाई बहिन होते है ।अगर नवम भाव आपका शुभ है तो आपको उनसे लाभ हो सकता है
- संजय सनम( ज्योतिष परामर्शक)

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