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जन्म कुंडली का अष्टम भाव

जन्म कुंडली का अष्टम भाव भी धन देता है

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ज्योतिष में अष्टम भाव का नाम आते ही एक डर,ख़ौफ़ की भावना आ जाती है क्योकि किसी भी जन्म कुंडली का अष्टम भाव दुर्घटना,मौत,अचानक घटना,देरी,रुकावट, बाधा,असफलता को विशेष बताता है इसलिए अष्टम भाव को एक तरह से लोग मनहूस भी समझते है क्योकि यह भाग्य अर्थात नोवे वे भाव से द्वादश होता है और नवा भाव भाग्य का होता है और उससे द्वादश अर्थात भाग्य भाव की हानि अर्थात दुर्भाग्य का रूपक बनता है इसलिए किसी भी जन्म कुंडली मे अष्टम भाव का ज्ञान अति आवश्यक होता है।

अष्टम भाव को रहस्यात्मक भाव कहते है क्योकि यह अचानक अनपेक्षित घटना देता है और यहां अगर राहु की उपस्थिति हो गई तब उस घटना का स्वरूप बहुत बड़ा हो जाता है।यह भाव जो इतना नकारात्मक बिंदु रखता है भला वो कैसे धन दे सकता है!

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यह सवाल आपके जेहन में आ सकता है-ज्योतिष में एक खास बात आपको जाननी जरूरी है कि जैसे खराब से खराब दुष्ट से दुष्ट व्यक्ति में भी कही कुछ अच्छे गुण भी होते है वैसे ही नकारात्मक दिखने वाले भाव भी चमत्कारिक सकारात्मक परिणाम भी दे देते है।ठीक उसी तरह संत स्वरूप दिखने वाले गुणी व्यक्तियों में भी कही न कही कुछ दोष होते है कुछ वैसे ही अच्छे दिखने वाले भाव, ग्रह भी कही न कही नकारात्मक परिणाम दे देते है

अष्टम भाव के खजाने में धन होता कहा कहा है! अब यह जानना जरूरी है-- यह भाव सप्तम भाव

दूसरा अर्थात धन का भाव है अर्थात यहां से पत्नी,पति,अर्थात जीवन साथी का धन व व्यापारिक साझेदार के धन को देखा जाता है अर्थात ससुराल का धन,दहेज यहां से देखा जा सकता है।अष्टम भाव का एकादश भाव षष्ठम होता है जो कि मां अर्थात ननिहाल का धन इंगित करता है।कानूनी मुकदमे से जीत का धन भी यहां से देखा जाता है अर्थात शत्रु का अर्थात आपके विरोधी का धन यहां हो सकता है।

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अष्टम भाव से बीमे की धन राशि,वसीयत का लाभ देखा जाता है।अष्टम भाव गुप्त धन को बताता है यहां से गड़ा हुआ धन मिलने की संभावना बनती है।अष्टम भाव बिना कमाई का धन बताता है इसलिए यहां से लॉटरी का धन भी देखा जाता है।अष्टम भाव ज्योतिष,तंत्र,मंत्र यंत्र से प्राप्त धन का भी कारक होता है- परालौकिक विज्ञान की प्रक्रियाएं करने वाले लोग अष्टम भाव से विशेष धन कमाते है यहां अष्टम का एकादश से संयोग होना आवश्यक होता है।

अष्टम भाव खान की खुदाई से प्राप्त धन का कारक है यह विदेश यात्रा का भी कारक है अर्थात वहां से भी धन लाभ की संभावना को यह भाव बताता है।

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