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शुक्र ग्रह को शक्तिशाली कैसे बनाये!

शुक्र ग्रह को शक्तिशाली कैसे बनाये

सोशल मीडिया

अगर आपके जन्मांग चक्र में शुक्र ग्रह कारक है तब फिर सुख, समृद्धि,भोग विलास,ऐश्वर्य,प्रेम,आकर्षण के लिए आपके जन्मांग चक्र में शुक्र ग्रह का मजबूत होना अति आवश्यक है तभी आप जीवन के समस्त भोगों को प्राप्त कर सकते है क्योकि बिना शुक्र के न तो सौंदर्य की वो चमक मिलती है न ही आकर्षित करने की क्षमता आती है।शुक्र कला का ग्रह है इसलिए कामकला भी इससे देखी जाती है।

शुक्र मजबूत करने के लिए मंत्र विद्वानों ने बताए है।

शुक्र महाग्रह मंत्र ॐ नमो अर्हते भगवते श्रीमते पुष्‍पदंत तीर्थंकराय। अजितयक्ष महाकालियक्षी सहिताय ॐ आं क्रों ह्रीं ह्र:।। शुक्र महाग्रह मम दुष्‍टग्रह। रोग कष्‍ट निवारणं सर्व शान्तिं च कुरू कुरू हूं फट्।। मध्‍यम मंत्र ॐ ह्रीं श्रीं क्‍लीं शुक्रग्रह अरिष्‍ट निवारक श्री पुष्‍पदंत जिनेन्‍द्राय नम: शान्तिं कुरू कुरू स्‍वाहा लघु मंत्र ॐ ह्रीं णमो अरिहंताणं तांत्रिक मंत्र ॐ द्रां द्रीं द्रौं स: शुक्राय नम: शुक्र गायत्री मंत्र ॐ भृगुवंशजाताय विद्यमहे। श्वेतवाहनाय धीमहि।तन्नो : कवि: प्रचोदयात॥ इसके अलावा नवग्रह को शांत करने वाला भी एक प्रचलित मंत्र भी प्रयोग किया जा सकता है।

शुक्र अगर पापाचारी है तब इसकी शांति के लिए दान किया जाता है पर अगर शुभ है पर निर्बल है तब शुक्र के कारक तत्वों का दान नही करके मंत्र जाप व रत्न हीरा,ओपल,स्फटिक को धारण करना चाहिए।

कुछ तांत्रिक प्रयोग भी शुक्र शांति के लिए बताए जाते है जैसे चींटियों को शक्कर खिलाना, सफेद गाय को आटा खिलाना या शुक्र शांति की बात हो तब सफेद वस्तुओं का दान करना।

शुक्र वीर्य का कारक है इसलिए जन्मांग चक्र में कमजोर शुक्र मर्दाना कमजोरी का परिचायक भी बनता है यहां पर शुक्र अर्थात धातु को मजबूत करने वाली देशी जड़ी बूंटीयो का प्रयोग जातक के लिए लाभदायक हो सकता है।

शुक्र दाम्पत्य सम्बन्धों का कारक है क्योकि शुक्र के अधीन सौंदर्य भी है प्रेम भी है और सेक्स भी है इसलिए सफल वैवाहिक जीवन मे शुक्र ग्रह की शुभता अत्यंत आवश्यक मानी जाती है और इसका जन्मांग चक्र में शुभ होना अति आवश्यक होता है पर जिन लग्नों के लिए शुक्र कारक नहीं है वहां इसका प्रबल होना उस भाव विशेष के लिए हानिकारक होता है।सिंह लग्न वालों को शुक्र को प्रबल करने का प्रयास नही करना चाहिए उनके लिए सूर्य का प्रबल होना अधिक आवश्यक है।

आलेख: संजय सनम( ज्योतिष परामर्शक)

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