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अपना पिछला और अगला जन्म अपने जन्मांग से जानिए...

आपके जन्मांग चक्र में आप पिछला और अगला जन्म जान सकते है

Corbie mitleid

व्यक्ति के मन मे इस तरह की जिज्ञासा रहती ही है कि उसका पिछला जन्म कैसा था--क्या इस जीवन अर्थात वर्तमान की तुलना में पिछला जीवन अच्छा था या फिर यह जीवन अच्छा है--पिछले जन्म में कहां था यह जिज्ञासा भी रहनी स्वाभाविक है पर इसके लिए आपको पास्ट लाइफ थेरेपी में जाना पड़ता है जहां एक नही बल्कि आपके कई जन्म खुल सकते है और उन जन्मों में आपके परीचित लोग आपके इस जीवन मे भी आपके बहुत करीब या फिर दिल से दूर दिख सकते है।

यहां हम पास्ट लाइफ थेरेपी की बात नही करेंगे बस इस विषय पर ध्यान केंद्रित करेंगे कि क्या हमको यह पता चल सकता है कि हमारा पूर्व जन्म हमारे इस जन्म से अच्छा था या हल्का था तथा आने वाला जन्म कैसा होगा! क्या ज्योतिष में हमारा वर्तमान जन्मांग चक्र हमको हमारे पूर्व व आने वाले जन्म के बारे में कुछ राह दिखा सकता है!

वैदिक ज्योतिष में अष्टक वर्ग की गणित से हम यह जान सकते है कि हमारा यह जीवन हमारे पूर्व या फिर आने वाले जीवन से बेहतर है या फिर वे जीवन हमारे इस जीवन से अच्छे है।

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हमारे इस जीवन के जन्मांग चक्र में हम इस जीवन के साथ हमारे पूर्व जीवन अर्थात इस जन्म से पहले का तथा इस जन्म के बाद जो जीवन हमे मिलेगा उसका अनुमान लग सकता है। इस जीवन के जन्मांग चक्र में लग्न अर्थात पहला भाव इस जन्म का घोतक है तथा इसी जन्मांग चक्र में पंचम भाव हमारे इस जन्म से पूर्व के जन्म का घोतक है तथा 9 वा भाव आने वाले जन्म की स्थिति हमको बताएगा।

अब हमको हमारे इस जन्मांग चक्र में अष्टक वर्ग के बिंदुओं की जोड़ को प्रथम,पंचम व नवम भाव से तुलना करनी है अर्थात अगर हमारे लग्न भाव अर्थात इस जन्म के भाव मे अष्टक वर्ग बिंदु की संख्या पंचम भाव से अधिक है तो इसका अर्थ साफ है कि पिछले जन्म में आपको संघर्ष अधिक पड़ा था तथा मुश्किल अधिक झेलनी पड़ी है पर यह जन्म आपके पिछले जन्म की तुलना में बहुत बेहतर है।अब अगर 9 वे भाव के अष्टक वर्ग बिंदु की जोड़ लग्न भाव से अधिक है तो इसका अर्थ यह है कि पिछले जन्म की तुलना में आपका यह जन्म बेहतर है पर इस जन्म से भी और अधिक शानदार जीवन आपका अगला जन्म होगा।

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अष्टक वर्ग के बिंदुओं को लग्न अर्थात1 व पंचम अर्थात 5 व नवम अर्थात 9 वे भाव मे लगाइए -जहाँ अष्टक वर्ग के बिंदु अधिक है अर्थात वो जीवन आपके लिए बेहतर अधिक सफल है क्योकि इसमे संघर्ष कम है तथा जहां अष्टक वर्ग के बिंदुओं की जोड़ कम है तो इसका अर्थ आपका वो जीवन जिसमे अष्टक वर्ग बिंदुओं की जोड़ कम है तो यह स्पष्ट संकेत है कि वो जीवन आपके लिए संघर्ष ही संघर्ष का रहा है। अष्टक वर्ग की गणित अर्थात इनके बिंदूओ की जोड़ व्यक्ति के जीवन की स्थिति को परिभाषित करने में कारगर मानी जाती रही है।

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