शुक्र ग्रह के कारक प्रभावों को जानिये
ज्योतिष के नव ग्रहों में शुक्र ग्रह स्त्री ग्रह के रूप में भोग विलास,ऐश्वर्य का कारक माना जाता है--शुक्र ग्रह कला,नृत्य का प्रतिनिधित्व करता है।शुक्र ग्रह प्रेम संबंधों का भी प्रतीक है तथा काम वासना का क्षेत्र भी इस ग्रह के अधीन आता है
जिस तरह से अन्य ग्रह भी विभिन्न नक्षत्र व राशियों में अपने विशेष प्रभाव देते है उसी प्रकार शुक्र ग्रह वृषभ व तुला राशि मे विशेष श्रेष्ठ व शनि की कुम्भ राशि मे भी योगकारक पर बुध की कन्या राशि मे नीचत्व के प्रभाव में माना जाता है
शुक्र ग्रह गुरु ग्रह की राशि मीन व धनु में भी श्रेष्ठ प्रभाव नही देता और सूर्य के साथ शत्रुवत व्यवहार होने से सिंह राशि मे भी इसकी उपस्थिति अच्छी नहीं मानी जाती।
शुक्र का सूर्य के साथ जन्मांग चक्र में संयोग भी अनस आधार पर नकारात्मक प्रभाव करता है कुछ इसी प्रकार गुरु ग्रह के साथ युति भी कही न कही टकराव का कारक बनती है क्योकि गुरु ग्रह देवताओं का प्रतिनिधित्व करते है तो शुक्र शुक्राचार्य के रूप में दैत्य शक्ति का प्रतिनिधित्व करते है।
शुक्र का राहु के साथ संयोग राशि ,नक्षत्र के आधार पर राहु की जहां उपस्थिति व कारकत्व प्रभाव होता है उस क्षेत्र को कई गुना बढ़ा देता है यह कला, रोमांस, रोमांच, सेक्स की तरफ जातक के मन को आकृष्ट कर ही देता है।
एक बात अनुभवों में आई है कि सिंह लग्न के जातकों के लिए शुक्र की दशा अक्सर कष्टकारक होती है जबकि सिंह लग्न से शुक्र की तुला व वृषभ राशि 3 व 10 भाव होती है यहां व्यक्ति को अक्सर अपने छोटे भाई बहन से तकलीफ या उनको तकलीफ,पड़ोसी से मनमुटाव,शत्रुता व छोटी यात्राओं में व्यर्थ भटकाव व नुकसान तथा दशम भाव से पिता को परेशानी तथा कर्म क्षेत्र में नुकसान से जूझना पड़ता है।अगर शुक्र सिंह लग्न की कुंडली मे तृतीय व दशम होता है तब ये परिणाम विशेष होते है।
सिंह लग्न की कुंडली मे शुक्र जिस घर,राशि,नक्षत्र में होता है विशेष रूप से प्रभावित वे स्थान और उनके कारकत्व ही होते है।
शुक्र धन,संपति,भोग विलास,ऐश्वर्य का कारक है इसलिए इसका मजबूत होना अति आवश्यक माना जाता है और वृषभ,तुला लग्न में अगर ये इस राशि मे ही हो तब फिर योगकारक ग्रह होने से यह अतीव शुभ हो जाता है पर सिंह लग्न में शुक्र की मजबूती सूर्य के साथ क्लेश प्रदान करती है।
शुक्र सौंदर्य का कारक होने की वजह से तमाम सौंदर्य प्रसाधन सामग्री,ब्यूटी पार्लर्स का कारक होता है अर्थात शुक्र प्रधान वाले यहां से शानदार आय अर्जित कर सकते है।
यह सफेद वस्तु दूध डेयरी फार्म का भी कारक होता है इसलिए शुक्र प्रधान वाले इस क्षेत्र से भी रोजगार कर सकते है
यह सिनेमा,नाट्य,नृत्य गायन,वादन का कारक होता है इसलिए शुभ शुक्र वाले इन क्षेत्रों में सफलता अर्जित करते है शुक्र विवाह का कारक है अतः मैरिज ब्यूरो वाले भी शुभ शुक्र की वजह से अच्छा रोजगार कर सकते है
मंगल शुक्र राहु का संयोग होने से व्यक्ति सेक्स संबंधों से घिरा हो सकता है अगर कुंडली मे दूसरे शुभ प्रभाव न हो तब यह स्थिति फिर सेक्स को प्रत्यक्ष,अप्रत्यक्ष रोजगार भी बना सकती है
कुल मिलाकर शुक्र के प्रभाव व उसका कारकत्व अपने आप मे असीम व खास है पर प्रभाव राशि,लग्न,अंश,नक्षत्र के आधार पर ही पड़ता है
शुक्र ग्रह का मुख्य रत्न डायमंड अर्थात हीरा होता है जिसको चांदी या प्लेटिनम धातु में पहनने की सलाह दी जाती है तथा अक्सर लोग रिंग फिंगर अर्थात सूर्य की अंगुली में भी पहन लेते है जिसको अनुचित माना जाता है। मध्यमा अंगुली में इसको धारण करना अधिक श्रेष्ठ माना जाता है।
आलेख: संजय सनम( PLEASE LIKE,SHARE,FOLLOW)


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