आपका प्रारब्ध अर्थात भाग्य आपके हाथ मे छिपा है।
किस्मत अर्थात प्रारब्ध हमारे अपने किये गए अच्छे या हल्के कर्म जो नियति के कम्प्यूटर में जब फ़ाइल चढ़ती है और वो किस्मत बन कर हमारी जन्म कुंडली के चार्ट में और हाथ की हथेली की रेखाओं में ढल कर उतरती है। उस फ़ाइल में अगर कर्म अच्छे होते है तो फिर ग्रह,नक्षत्र,व हाथ की रेखाएं खुशकिस्मत को बयां करती है और जब कर्म अच्छे नही होते तब फिर नकारात्मक प्रभाव दर्शाती है।
आज इस आलेख में हम हथेली में लिखी या छिपी किस्मत की बात करते है जो हाथ की विभिन्न रेखाओं में हमारी खुश या बद किस्मत के रूप में हमारे कर्मो का भुगतान लेती है।हथेली में खुशकिस्मत के संकेत क्या है वो हथेली की बनावट, हथेली की कोमलता या कठोरता,हथेली का रंग ,व प्रकार जैसे चमसाकार,वर्गाकार, लंबा ,दार्शनिक ,कलाकार हाथ के रूप में जाना जाता है वहां से शुरू होकर अंगुलियों की लंबाई,उनके पोर की जांच व अंगुलियों के झुकाव या सीधा होना तथा अंगुष्ठ का लचीला होना या कड़ा होना तथा अंगुष्ठ के पोर का बड़ा या छोटा होने से लेकर फिर हाथ के चिन्ह जैसे हथेली में मंदिर,ध्वजा,शंख,चक्र,गदा जैसे अनेकों होते है के प्रभाव को पढ़ता हुआ मुख्य रेखाओं की गणित में आता है इन मुख्य रेखाओं के साथ कुछ प्रभावी रेखाएं जो बनती बिगड़ती रहती है वे चमत्कारिक रूप से उस विशेष काल खंड में प्रभावी बनती है जिस काल खंड से यह निकलती या टूटती है।
हथेली से किस्मत को पढ़ने के लिए बहुत अधिक सावधानी की आवश्यकता होती है क्योकि छोटी से छोटी रेखा का कट मारना या किसी मुख्य रेखा के साथ कुछ दूर तक ऊपर अर्थात उर्ध्वगामी होना या फिर किसी रेखा का नीचे की तरफ आना बहुत कुछ उल्टफेट कर देता है एक छोटी सी चूक गलत गणना का कारक बन जाती है। किसी हाथ मे जीवन रेखा,मष्तिष्क रेखा व भाग्य रेखा साफ व निर्दोष है पर्वत भी ठीक है और काटने वाली बाधक रेखाएं भी नही है फिर भी उस व्यक्ति को उतने शानदार परिणाम नही मिल रहे जो एक हस्त रेखा विशेषज्ञ सोचता है तो उसकी वजह हाथ का प्रकार व उसकी कठोरता या रंग हो सकता है इसलिए बहुत सावधानी आवश्यक है।
आपकीं खुशकिस्मती की हथेली में पहली निशानी आपकीं जीवन रेखा,ह्रदय रेखा,मष्तिष्क रेखा का स्वस्थ होना आवश्यक है क्योकि अगर आपका तन,मन स्वस्थ रहेगा तब ही जिंदगी के अन्य सुखों का आप आंनद ले सकेंगे वो हथेली जिसमे भाग्य रेखा ,यश रेखा,धनरेखा,व्यापार रेखा, विदेश यात्रा रेखाएं बहुत अच्छी हो पर जीवन रेखा ही नही हो अर्थात जीवन ही नही तब शेष इन रेखाओं के होने से क्या लाभ?
इसलिए जीवन की पहली खुशकिस्मत रेखा वो ही है जो आपके तन,मन की स्वस्थता व लंबी दीर्धायु जिंदगी का वादा करे इसलिए किसी के हाथ के परीक्षण में पहले उसकी जीवन रेखा,मष्तिष्क रेखा जो दिमाग को बताती है तथा ह्रदय रेखा जो आपके दिल व दिल से जुड़े भावनात्मक पहलुओं को इंगित करती है जब यह अच्छी हो तब यह उस जातक की खुशकिस्मती कही जा सकती है। तत्पश्चात भाग्य रेखा, सूर्य रेखा से जातक के जीवन मे सफलता व यश का आकलन किया जा सकता है।
हाथ मे जितने कम काट- छांट हो या राहु के क्रॉस न हो वो हाथ अच्छा माना जाता है अर्थात इस जातक को बाधाओं से जूझना अधिक नही पड़ता तथा दुर्घटनाएं भी नही होती इसलिए जिस हाथ मे भाग्य रेखा चाहे उतनी स्वस्थ न हो पर हाथ साफ सुथरा हो अर्थात जाल, रेखाओं का आपसी कटाव विशेष कर राहु रेखाएं न हो तो फिर व्यक्ति का जीवन बाधाओं से मुक्त रहने की वजह से आनंदित ही रहता है इसलिए हाथ मे उभरे हुए पर्वत,कम से कम रेखाएं अर्थात काटने वाली रेखाएं न हो तो जातक का जीवन सुखी रहता है।



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